गोस्वामी तुलसीदास विरचित

 

Ramcharitmanas

 

ભાવાત્મક પદ્યાનુવાદ  - શ્રી યોગેશ્વરજી

<< HOME | ADHYATMA | AUDIO | BOOKS | BHAJANS | KAVITAMAHABHARAT | RAMAYAN | SARAL GITA | UPANISHAD | MORE >>

 

बालकांड

   
< BACK

Bal Kand

NEXT >

Maya is powerful. so take refuge of Mayapati

 

(चौपाई)

एहि बिधि जनम करम हरि केरे । सुंदर सुखद बिचित्र घनेरे ॥
कलप कलप प्रति प्रभु अवतरहीं । चारु चरित नानाबिधि करहीं ॥ १ ॥
तब तब कथा मुनीसन्ह गाई । परम पुनीत प्रबंध बनाई ॥
बिबिध प्रसंग अनूप बखाने । करहिं न सुनि आचरजु सयाने ॥ २ ॥
हरि अनंत हरिकथा अनंता । कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता ॥
रामचंद्र के चरित सुहाए । कलप कोटि लगि जाहिं न गाए ॥ ३ ॥
यह प्रसंग मैं कहा भवानी । हरिमायाँ मोहहिं मुनि ग्यानी ॥
प्रभु कौतुकी प्रनत हितकारी ॥ सेवत सुलभ सकल दुख हारी ॥ ४ ॥
(सोरठा)

सुर नर मुनि कोउ नाहिं जेहि मोह माया प्रबल ॥
अस बिचारि मन माहिं भजिअ महामाया पतिहि ॥ १४० ॥
 

Another story behind Ram's incarnation

 

(चौपाई)

अपर हेतु सुनु सैलकुमारी । कहउँ बिचित्र कथा बिस्तारी ॥
जेहि कारन अज अगुन अरूपा । ब्रह्म भयउ कोसलपुर भूपा ॥ १ ॥
जो प्रभु बिपिन फिरत तुम्ह देखा । बंधु समेत धरें मुनिबेषा ॥
जासु चरित अवलोकि भवानी । सती सरीर रहिहु बौरानी ॥ २ ॥
अजहुँ न छाया मिटति तुम्हारी । तासु चरित सुनु भ्रम रुज हारी ॥
लीला कीन्हि जो तेहिं अवतारा । सो सब कहिहउँ मति अनुसारा ॥ ३ ॥
भरद्वाज सुनि संकर बानी । सकुचि सप्रेम उमा मुसकानी
लगे बहुरि बरने बृषकेतू । सो अवतार भयउ जेहि हेतू ॥ ४ ॥
(दोहा)

सो मैं तुम्ह सन कहउँ सबु सुनु मुनीस मन लाई ॥
राम कथा कलि मल हरनि मंगल करनि सुहाइ ॥ १४१
 

 
 

 

| Home | Adhyatma | Shri Yogeshwarji | Maa Sarveshwari | SarvaMangal | Swargarohan |  Site Map | News |

|Audio/video| Books | Contacts | Download | FAQ | Feedback | Glossary | Guest Book | Links | Photo Gallery | Search | What's New? |

Copyright © 2002-2008 by Swargarohan, Danta Road, Ambaji, North Gujarat, INDIA.  All Rights reserved. See Disclaimer