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हिमालय से लिखे खत

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श्री योगेश्वरजी द्वारा उनके हिमालयवास दौरान लिखे गये खतों का संग्रह

साहित्य में पत्रसाहित्य का अपना अनूठा स्थान है । साहित्य की बात एक तरफ रखते है, और आम जिन्दगी के बारे में सोचते है तो मेरा मानना है की जीवन के गठन-पुनर्गठन और खतों का गहरा तआलुक्क है । मुझे अपने निजी जीवन में खतों को लिखने, पढने एवं उसके परिशीलन से बहुत सहायता मिली है ।

इस किताब में समाविष्ट ज्यादातर खत मेरे हिमालय निवास के दौरान लिखे गये थे । प्रारंभ के खत मेरे हिमालय जाने की पूर्वभूमिका पर रोशनी डालते है । इस हिसाब से देखा जाय तो इसका मूल्य असाधारण है । इन खतों में साधनात्मक जीवन की कई बातें लिखी गयी है । जीवन-विकास में अभिरुचि रखनेवाले साधकों के लिये ये प्रेरक एवं पथप्रदर्शक सिद्ध होंगे एसी मुझे उम्मीद है ।

इ.स. १९४० से लेकर लिखे गये इन खतों में से अधिकांश खत श्री नारायणभाई ने गुणज्ञभाव से अपने पास महेफूज रक्खे थे । कुछ खत श्री भाईलालभाई की गुणदर्शी वृत्ति की वजह से सुरक्षित रहें । कुछ खत माताजी जब सरोडा रहती थी, तब लिखे गये थे । मेरे जीवनविकास की क्रमिक विचारणा करने में ये पत्रसंग्रह अवश्य लाभदायी सिद्ध होगा ।

- योगेश्वर

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The best way to find yourself is to lose yourself in the service of others.
- Mahatma Gandhi

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