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प्लानचेट

प्रश्न – क्या प्लान्चेट द्वारा महात्माओं के साथ संबंध स्थापित किया जा सकता है ॽ
उत्तर – हाँ, यह बात सच है । प्लानचेट एक विद्या है, जिसके द्वारा महात्माओं के साथ सम्बन्ध स्थापित कर सकते है । भारत में ही नहीं, पाश्चात्य देशों में भी इस विद्या का प्रचार है और कई लोग इसमें दिलचस्पी लेते हैं । इसमें रुचि रखनेवाले लोगों ने अपने स्वानुभव पर आधारित पुस्तकें या लेख लिखे हैं जो अत्यंत दिलचस्प और रोचक है । क्या आप भी प्लानचेट विद्या में दिलचस्पी रखते हैं ॽ क्या आप उसका प्रयोग करते है ॽ

प्रश्न – प्रयोग तो नहीं करता किंतु एक परिचित सज्जन प्रयोग करते हैं उनके साथ मेरा संबंध है । सप्ताह में एक बार हम उनके यहाँ इकठ्ठे होते हैं । वे दूसरे दो-तीन आदमियों के सहारे प्रयोग कर दिखाते हैं । वे हमारी इच्छा के अनुसार मृतात्माओं को बुलाकर उनके पास हमारे प्रश्नों के उत्तर दिलवाते हैं । मृतात्मा उत्तर देकर चले जाते हैं । कभी वे अपने सूचन देते हैं तथा गूढ एवं गुप्त रहस्य भी बतलाते हैं । इससे आश्चर्य होता है ।
उत्तर – आप यह सब देख दंग रह जाय, यह सच है और सही अर्थमें कहें तो यह विद्या ही अजीब तरह की है । माध्यम बननेवाले मनुष्यों के द्वारा इस विद्या का जो प्रदर्शन होता है उसमें गुप्तता या रहस्यमयता की कोई बात नहीं है । जो कुछ होता है वह खुलेआम ही होता है । हाँ कैसे होता है यह भेद की बात है । कुछ लोगों का यह कहना है कि उसके द्वारा मनुष्य के सुषुप्त भावविचार या संस्कार ही प्रकट होते हैं । हाँ, किंतु वह कैसे प्रकट होते हैं ॽ इसके पीछे कोई शक्ति अवश्य होगी । उस शक्ति के कारण ही लकडी के टेबल पर चोट लगती है और प्लान्चेट का प्रयोग सफल होता है ।

प्रश्न – इस पर से यही सिद्ध होता है कि मृतात्माओं को बुलाया जा सकता है ॽ
उत्तर – सिद्धांत की दृष्टि से इस बात को सच मानना अनुचित नहीं । किंतु व्यावहारिक रूप में दूसरे कई प्रश्न विचारणीय है । मान लीजिए कि मृतात्माओं को बुलाया जा सकता है तो भी उनको बुलाने से आपका या बुलानेवाले का कोई श्रेय होता है ॽ अपने कल्याण के लिये अगर वे कोई जानकारी दे; सूचना या युक्ति प्रदर्शित करें तो भी वे उनकी इच्छा अनुसार बर्ताव करने के लिये सर्वथा स्वतंत्र है । उनके द्वारा प्राप्त पथप्रदर्शन सच्चा ही होगा यह नहीं कहा जा सकता । कभी कभी तो वे बेबुनियाद बातें करते हैं और गलत जानकारी देते हैं । उसको सच मानकर इतमीनान से आगे बढ़ा जाये तो नुकसान होने का संभव है ।

प्रश्न – तो क्या यह मान लूँ कि आप को प्लान्चेट की विद्या में दिलचस्पी नहीं हैं ॽ
उत्तर – प्लान्चेट की विद्या दिलचस्प है किंतु उसे सर्वोत्तम मानकर उसमें डूब जाने में कोई बुद्धिमानी नहीं है । इस विद्या से जीवन का आत्यंतिक कल्याण नहीं होता । परम कल्याण के लिये तो दूसरी सब विद्याओं को गौण समझकर केवल अध्यात्मविद्या का ही सहारा लेना पड़ेगा । अगर जीवन का चरम श्रेय चाहते हैं तो आप अपने हृदय के भीतर गोता लगाईए और मृतात्माओं के साथ नहीं, जीवित परमात्मा के साथ नाता जोड़िये । उसका पथ-प्रदर्शन लीजिए और उसके साथ घनिष्ठ संबंध रखिए । अगर आप ईमानदारी व आत्मविश्वास के साथ प्रयत्न करेंगे तो आखिरकार आप आत्मशक्ति की चरमसीमा पर पहुँच जायेंगे । दूसरी विद्याएँ तो जीवन के सच्चे आदर्श को भुला देनेवाली हैं । आप भी यदि जीवन के आदर्श को विस्मृत कर देंगे तो आपको बड़ी भारी हानि होगी, यह अच्छी तरह याद रखें । अगर आप शांति, मुक्ति और पूर्णता की कामना रखते हैं तो ईश्वर-साक्षात्कार को ही अपने जीवन का मकसद बनायें । इसीमें आपकी भलाई है ।

प्रश्न – आपने प्लानचेट के बारे में जो कहा उस परसे मुझे जिज्ञासा उत्पन्न हुई है । थोडे समय पहले मेरे एक स्वजन का देहांत हो गया है । तो क्या प्लानचेट के प्रयोग के द्वारा वे कहाँ गये होंगे यह जाना जा सकता है ॽ मैं उनका सम्पर्क करना चाहता हूँ । अगर आप ऐसा प्रयोग करनेवाले व्यक्ति का नामनिर्देश करेंगे तो मुझे लाभ होगा ।
उत्तर – आप अपने मृत स्वजन का संपर्क क्यों स्थापित करना चाहते हैं ॽ मैं तो मानता हूँ कि आपको यह विचार ही छोड़ देना चाहिए । कभी कभी कोई दूसरे ही हमारे स्वजन का स्वांग लेकर प्लानचेट पर उपस्थित होते हैं । उन्हें आप कैसे पहचान सकेंगे ॽ और मान लीजिए यदि आप उन्हें पहचान सकते हैं तो भी वे स्वजन आपसे बिछड़ गये हैं और कर्म-सिद्धांत के अनुसार उनका निवास दूसरी जगह पर हुआ है । उन्हें बुलाकर उनकी शांति में विघ्न डालने का कार्य उचित नहीं है । मृत्यु ने उन्हें आपसे दूर किया है । आपका उनके प्रति जो अनुराग है, ममता है, उसे दूर कीजिए । सुखी होने का यही सच्चा उपाय है । जन्मांतर में आपने ऐसे तो कई संबंध स्थापित किये है, जो आज नहीं रहे । इस तरह इस संबंध से भी लगाव रखने की जरुरत नहीं है । यह संसार नश्वर है । अगर इसमें कोई सनातन है तो वह ईश्वर ही है । वही हमारा सच्चा स्वजन और हितैषी है । इस बात को अच्छी तरह याद करके जीवनको ईश्वरमय बनाने से ही लाभ होगा । राग नहीं अपितु वैराग्य, ममता नहीं, निर्ममता ही और प्लान्चेट जैसे सामान्य प्रयोग नहीं किंतु ईश्वर के साथ योग का असाधारण अनुभव ही हमें शांति देगा ।

- © श्री योगेश्वर (‘ईश्वरदर्शन’)

 

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Do not wait to strike till the iron is hot; but make it hot by striking.
- William B. Sprague

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