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ईश्वरदर्शी संतपुरुष

प्रश्न – क्या ऐसे कोई महापुरुष अभी जीवित होंगे जिनको ईश्वर का साक्षात्कार हुआ हो ॽ अगर हाँ तो क्या हमारे जैसे साधारण मनुष्य को उनके दर्शन समागम का लाभ मिल सकता है ॽ
उत्तर – ऐसे महापुरुष अवश्य विद्यमान है और उनके दर्शन समागम का लाभ सबको मिल सकता है ।

प्रश्न – उसके लिए हमें मुख्य रूप से क्या क्या करना होगा ॽ
उत्तर – उनसे साक्षात्कार करने की, उनसे लाभ प्राप्त करने की प्रबल कामना होनी चाहिए और अपनी कामनापूर्ति करने हेतु सात्विक मन से ईश्वर को प्रार्थना करनी चाहिए ।

प्रश्न – उसके अतिरिक्त अन्य क्या करना चाहिए ॽ
उत्तर – इतना काफी है, परन्तु एक बात का स्मरण रहे कि आपको महात्मा या सिद्धपुरुष मिले या न मिले उनकी राह देखने के बजाय अपने आपको उस साँचे में ढालकर ईश्वर के पास पहुँचने का अथक प्रयास करना चाहिए । आप अपने जीवन में जिस स्वस्थता एवम् शांति की कामना करते हो, वह स्वस्थता और शांति तभी प्राप्त हो सकती है जब आप अपना सुविकास करके प्रभु के करीब पहुँचने के निरंतर प्रयास में निमग्न हो । महापुरुष के दर्शन, साक्षात्कार का लाभ प्राप्त करके आखिरकार आपको अपना सुविकास ही करना होता है ।

प्रश्न – ऐसे ईश्वरदर्शी, ईश्वरीय कृपापात्र महापुरुष हम पर अनुग्रह करके क्या अपनी सभी अभिलाषा व इच्छा की पूर्ति न कर दे ॽ वे हमें ईश्वर से साक्षात्कार ना करवा सके ॽ समाधि या ईश्वर दर्शन प्राप्त न करा सके ॽ
उत्तर – ऐसा हमें क्यों कराना चाहिए ॽ ऐसी उम्मीद हमें क्यों रखनी चाहिए ॽ

प्रश्न – हम पर अनुग्रह के हेतु ।
उत्तर – परन्तु हम पर वैसी कृपा वे क्यों करे ॽ वैसे भी हम पर महात्मा पुरुष कृपा करे वैसी योग्यता भी हममें होनी चाहिए न ॽ

प्रश्न – रामकृष्ण परमहंस ने अपने शिष्य विवेकानंद पर कृपा करके उनको मा भगवती जगदंबा से साक्षात्कार करवाया था, दर्शन करवाया था इतना ही नहीं विवेकानंद को समाधि अवस्था की अलौकिक अनुभूति का भी एहसास नहीं कराया था ॽ ठीक वैसे ही कोई महापुरुष, सिद्ध पुरुष हमारे मस्तक पर हाथ रखे तो भवसागर पार हो जाए, दर्शन प्राप्त हो जाएँ, समाधि स्थिति की अनुभूति हो जाएँ, विविध सिद्धियाँ प्राप्त हो जाए, तब तो साधना करने का प्रयास भी न करना पडे और अपने आप ही सप्तमी भूमिका पर हम पहुँच जाएँ ।
उत्तर – परंतु ऐसे कोई प्रतापी, दैवी महापुरुष आपको मिले और आपके मस्तक पर हाथ रखे तब ना ॽ आप ऐसे महापुरुष से इसलिए मिलना चाहते हो ताकि बिना किसी योग्यता आप सिद्धि प्राप्त कर सके ॽ शायद आपको सिद्धपुरुष प्राप्त भी हो जाए तो वह आपकी सहायता करेंगे एसा कैसे मान लिया जाए ॽ वह सिद्धपुरुष आपके मस्तक पर हाथ रखेंगे और आपको समाधि प्राप्त होगी, और समाधि की अवस्था को आप सहन कर पाओगे ऐसा मान लेने की कोई आवश्यकता नहीं है । आपने विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस की बात की परन्तु क्या यह कभी सोचा है कि शिष्य विवेकानंद पर उनके गुरु महात्मा रामकृष्ण परमहंस की इतनी कृपा क्यों हुई ॽ विवेकानंद के व्यक्तित्व की विराटता, विशालता कितनी थी क्या आपको ज्ञात है ॽ गुरु परमहंस उन पर इसलिए इतनी कृपा की क्योंकि विवेकानंद अपने गुरु के इस अनुग्रह कृपा को सहन कर पाए । रामकृष्ण परमहंस के एक और शिष्य भक्त मथुरबाबु का क्या हुआ था, ज्ञात है ॽ जब रामकृष्ण परमहंस ने शिष्य मथुरबाबु के मस्तक पर हाथ रखा तो वह उनका तेज सहन नहीं कर पाए और चित्कार कर उठे । अतः बिना किसी प्रयास किए, बिना अपने अधिकार को जमाए, अपने आपको योग्य बनाए, सिद्धि प्राप्त करने की लालसा मन में नहीं रखनी चाहिए । उचित तो यह होगा कि स्वयं को सिद्धि प्राप्त करने के योग्य बनाया जाय ।

- © श्री योगेश्वर (‘ईश्वरदर्शन’)

 

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It is easy to be friendly to one's friends. But to befriend the one who regard himself as your enemy is the quientessence of true religion. The other is mere business.
- Mahatma Gandhi

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