Friday, September 25, 2020

Ayodhya Kand

People salute Bharat

लोगों द्वारा भरत की प्रसंशा
 
भायप भगति भरत आचरनू । कहत सुनत दुख दूषन हरनू ॥
जो कछु कहब थोर सखि सोई । राम बंधु अस काहे न होई ॥१॥
 
हम सब सानुज भरतहि देखें । भइन्ह धन्य जुबती जन लेखें ॥
सुनि गुन देखि दसा पछिताहीं । कैकइ जननि जोगु सुतु नाहीं ॥२॥
 
कोउ कह दूषनु रानिहि नाहिन । बिधि सबु कीन्ह हमहि जो दाहिन ॥
कहँ हम लोक बेद बिधि हीनी । लघु तिय कुल करतूति मलीनी ॥३॥
 
बसहिं कुदेस कुगाँव कुबामा । कहँ यह दरसु पुन्य परिनामा ॥
अस अनंदु अचिरिजु प्रति ग्रामा । जनु मरुभूमि कलपतरु जामा ॥४॥
 
(दोहा)  
भरत दरसु देखत खुलेउ मग लोगन्ह कर भागु ।
जनु सिंघलबासिन्ह भयउ बिधि बस सुलभ प्रयागु ॥ २२३ ॥

 

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