Tuesday, August 04, 2020

हिमालय से लिखे खत

himalaya-na-patro

श्री योगेश्वरजी द्वारा उनके हिमालयवास दौरान लिखे गये खतों का संग्रह

साहित्य में पत्रसाहित्य का अपना अनूठा स्थान है । साहित्य की बात एक तरफ रखते है, और आम जिन्दगी के बारे में सोचते है तो मेरा मानना है की जीवन के गठन-पुनर्गठन और खतों का गहरा तआलुक्क है । मुझे अपने निजी जीवन में खतों को लिखने, पढने एवं उसके परिशीलन से बहुत सहायता मिली है ।

इस किताब में समाविष्ट ज्यादातर खत मेरे हिमालय निवास के दौरान लिखे गये थे । प्रारंभ के खत मेरे हिमालय जाने की पूर्वभूमिका पर रोशनी डालते है । इस हिसाब से देखा जाय तो इसका मूल्य असाधारण है । इन खतों में साधनात्मक जीवन की कई बातें लिखी गयी है । जीवन-विकास में अभिरुचि रखनेवाले साधकों के लिये ये प्रेरक एवं पथप्रदर्शक सिद्ध होंगे एसी मुझे उम्मीद है ।

इ.स. १९४० से लेकर लिखे गये इन खतों में से अधिकांश खत श्री नारायणभाई ने गुणज्ञभाव से अपने पास महेफूज रक्खे थे । कुछ खत श्री भाईलालभाई की गुणदर्शी वृत्ति की वजह से सुरक्षित रहें । कुछ खत माताजी जब सरोडा रहती थी, तब लिखे गये थे । मेरे जीवनविकास की क्रमिक विचारणा करने में ये पत्रसंग्रह अवश्य लाभदायी सिद्ध होगा ।

- योगेश्वर

Today's Quote

When I admire the wonders of a sunset or the beauty of the moon, my soul expands in the worship of the creator.
- Mahatma Gandhi

prabhu-handwriting

We use cookies on our website. Some of them are essential for the operation of the site, while others help us to improve this site and the user experience (tracking cookies). You can decide for yourself whether you want to allow cookies or not. Please note that if you reject them, you may not be able to use all the functionalities of the site.

Ok