ऋषिकेश में एक रोज मेरा परिचय एक गुजराती परिवार से हुआ । परिवार के मुखिया ने बिना किसी पूर्वपरिचय कहा: 'हमारे गुरुजी बहुत महान और समर्थ है । वो ज्यादातर आलंदी में रहते है, कभीकभा हमारे घर आकर रहते है । पूना में हमारे अलावा उनके कई भक्त है । उम्र में वो काफि बडे है, गुजराती है और उच्च दशा प्राप्त कर चुके है । हम बरसों से उनके परिचय में है । हीरों की असली परख तो जौहरी ही कर सकता है । आप अध्यात्म मार्ग के प्रवासी है । अगर उनके दर्शन की इच्छा हो तो जरूर आना । मैं आपको पता दूँगा । उनके पास कई लोग अपनी शंका का समाधान करने आते है ।'
अब उनके गुरुप्रेम के बारे में मैं क्या कहूँ ? आश्चर्य तो इस बात का था की जिसकी गतिविधि या विचारों के बारे में उनको पूरा पता नहीं था, उसके लिये उनके दिल में इतना प्रेम था ! धन्य है उनकी श्रद्धा को ।
मैंने कहा: 'मुझे किसी भी प्रकार की कोई शंका नहीं है । फिर भी आप पता देना । अगर उस तरफ आना हुआ तो जरूर मिलूँगा ।' मेरी बात सुनकर उन्हें खुशी हुई ।
'वो सचमुच दर्शनीय है, उनके जैसे महात्मा भारत में शायद ही होंगे ।'
मैंने कहा: 'उच्च कोटि के कई महात्मा हिमालय में निवास करते है । हाँ, वो आसानी से नहीं मिलते, और अगर मिल भी जायें तो उनको पहचानना मुश्किल होता है । आपने अपने गुरुदेव में क्या विशेषता देखी ? क्या आपको एसा अनुभव हुआ की वो भूत-भविष्य की बातें बता सकते है ? आपने सांईबाबा का नाम तो सुना ही होगा, उनके जीवनप्रसंग सुने होगे । क्या उनके जैसा कोई प्रसंग आपके गुरु के जीवन में हुआ है ? उनकी लोकोत्तरता की प्रतिती हो, एसी कोई घटना घटी है ? संत ज्ञानेश्वर या समर्थ रामदास की तरह उनमें वचनसिद्धि है ? वैसे तो यहाँ कई विद्वान, सत्वगुणी और शांत संत-महात्मा रहते है । अगर आपके गुरु में आत्म-साक्षात्कार या इश्वरदर्शन के फलस्वरूप कोई विशेष शक्तियाँ है तो मुझे उनसे मिलने में खुशी होगी । अलबत्त एसी विशेष शक्ति नहीं होने पर भी व्यक्ति इश्वरदर्शी हो सकता है । विशेष शक्ति का होना सोने पे सुहागा जैसा है । क्या आपके जीवन में उनकी समर्थता के परिचायक कोई प्रसंग हुए है ? एसा है तो मुझे बताओ ।'
उन्होंने कहा: 'नहीं, एसा तो कुछ नहीं है । मगर उनमें एसी शक्ति है इसका पता हमें कैसे चलेगा ?'
मैंने कहा, 'संतमहात्माओं का समागम करने से हम उनके बारे में जान सकते है । आप अपने गुरु को कई सालों से जानते हो, तो आपको थोडा-बहुत अंदाजा होना चाहिये । मैंने केवल जिज्ञासा से आपको कहा है । बाकी आप संतपुरुष की सेवा कर रहे है, ये अच्छी बात है । गृहस्थीओं के लिये संतसमागम से ज्यादा लाभदायी और कुछ नहीं है । सात्विक स्वभाव, सांसारिक विषयों के रुचि का अभाव, तथा आत्मा को जानने का निरंतर प्रयास - जिसमें यह लक्षण दिखे, उसको पूज्य मानना चाहिए । इश्वरकृपा के अलावा संतो से प्यार नहीं होता । सिद्ध संतपुरुषों का इस धरातल पर होना एक चमत्कार से कम नहीं है ।'

