Saturday, October 24, 2020

ध्यान करते वक्त आसन

प्रश्न – ध्यान करते वक्त किसी निश्चित आसन में ही बैठना चाहिए या किसी भी आसन में बैठ सकते हैं ॽ मैं तो प्रयत्न करने पर भी पद्मासन में बैठ नहीं सकता तो पद्मासन के बिना चल सकता है या नहीं ॽ
उत्तर – पद्मासन के बिना चलेगा । योग के ग्रन्थों में कहा गया है कि ध्यान करते समय पद्मासन, स्वस्तिकासन या सिद्धासन का आधार लेना चाहिए । स्वास्थ्य की दृष्टि से ये आसन अच्छे हैं और मन की एकाग्रता में सहायक हैं । फिर भी जो उनको सिद्ध न कर सके वह ध्यान कर ही न सके ऐसा नहीं समझना है । महर्षि पतंजलि ने अपने योगदर्शन में आसन की परिभाषा देते हुए कहा है –जो स्थिरता व सुख का अनुभव कराये उस बैठने की पद्धति को आसन कहते हैं । इस दृष्टि से सोचा जाय तो उन्होंने पद्मासन जैसे किसी विशेष आसन का समर्थन नहीं किया । आप अगर पद्मासन में बैठ सकते हैं तो अच्छा है किंतु यदि बैठा न जाये तो सुखासन का प्रयोग कर सकते हैं । याद रखें, ध्यान में आसन का उतना महत्व नहीं जितना मन की एकाग्रता या स्थिरता का है । हमें उसकी सिद्धि की ओर ही ध्यान रखना चाहिए ।

प्रश्न – ध्यान के लिए उत्तम समय कौन सा है ॽ
उत्तर – प्रातःकाल, संध्याकाल या फिर मध्यरात्रि के बाद का समय ध्यान के लिये उत्तम है । उस वक्त वातावरण नितांत शांत होता है । उस वक्त ध्यान करने से मन आसानी से स्थिर हो जाता है । इसीलिए उसे उत्तम माना गया है । बाकी मन को शांत करने की साधना में सहायक हो ऐसे किसी भी अनुकूल समय में ध्यान किया जा सकता है ।

प्रश्न – सगुण ध्यान उत्तम है या निर्गुण ॽ
उत्तर – दोनों प्रकार के ध्यान उत्तम एवं उपकारक हैं । मनुष्य की रुचि को ध्यान में रखकर उनका निर्माण किया गया है इसलिए उत्तम और निकृष्ट की बहस मत कीजिए । आपकी प्रकृति के अनुसार आपको जो अनुकूल लगे उसका आश्रय लेकर आगे बढ़िये । यही उचित है ।

प्रश्न – ध्यान या जप करते वक्त नींद आती है उसका क्या कारण है ॽ
उत्तर – पर्याप्त आराम के अभाव में कभी नींद आ जाती है तो कभी मात्रा से ज्यादा भोजन लेने से भी ऐसा होता है । कभी कभी मन की दुर्बलता के कारण भी निद्रा का अनुभव होता है । कुछ भी हो किंतु ध्यान या जप के लिये यह स्थिति आशीर्वाद समान नहीं है इसमें कोई सन्देह नहीं । इसलिए उससे छूटकारा पाने के लिये पर्याप्त निद्रा लेने के बाद ही ध्यान या जप करने के लिए बैठिये । रातको जल्दी और सूक्ष्म भोजन लेना चाहिए । जब सुस्ती, निद्रा या आलस्य जैसा लगे तो मुँह धोकर कुछ समय चहल-कदमी कीजिए और बाद में कुछ समय तक खुली आँख रखकर जप या ध्यान कीजिए । इस तरह करने से धीरे धीरे नींद की शिकायत दूर हो जायेगी ।

- © श्री योगेश्वर (‘ईश्वरदर्शन’)

 

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There are only two ways of spreading light - to be the candle or the mirror that reflects it.
- Edith Wharton

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